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Aughad - औघड़ | By Nilotpal Mrinal | 1st Edition | Hind Yugm Publication ( Hindi Medium )

186-299
[Shipping Cost = Standard Mode, Expedite Mode]
Aughad - औघड़ | By Nilotpal Mrinal | 1st Edition | Hind Yugm Publication ( Hindi Medium ).

📖 पुस्तक का सारांश:
"औघड़" एक बेहतरीन हिंदी उपन्यास है जो समाज, राजनीति, आध्यात्मिकता और मानवीय संवेदनाओं की गहराइयों को छूता है। यह नीलोत्पल मृणाल की लेखनी का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें यथार्थवादी भाषा, ग्रामीण जीवन की झलक, और तीखे सामाजिक सवालों को अद्भुत तरीके से पिरोया गया है।

‘औघड़’ न केवल एक शब्द है, बल्कि एक विचार है — जो दुनियावी बंधनों से मुक्त, निडर, और सत्य की खोज में लीन व्यक्ति का प्रतीक है। उपन्यास का नायक समाज के ढोंग, पाखंड और राजनैतिक छल-प्रपंचों के विरुद्ध खड़ा होता है। यह पुस्तक आज के सामाजिक परिप्रेक्ष्य में युवाओं को आत्ममंथन और परिवर्तन की राह पर चलने को प्रेरित करती है।

✨ प्रमुख विशेषताएँ:
🖋️ नीलोत्पल मृणाल की अनूठी लेखन शैली – व्यंग्य, कटाक्ष और संवेदनशीलता का अद्भुत मिश्रण।

🧠 गंभीर सामाजिक मुद्दों की पड़ताल – भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, जातिवाद, और धर्म के नाम पर राजनीति।

🔥 यथार्थवादी पात्र और संवाद – ग्रामीण भारत की सच्ची झलक।

🎭 दर्शन और आध्यात्मिकता की गहराई – औघड़ अवधारणा को व्यावहारिक और बौद्धिक रूप से प्रस्तुत किया गया है।

📢 समकालीन भारत की कथा – जो आज के युवाओं को गहराई से जोड़ती है।

🧩 आत्मखोज और विद्रोह का संगम – नायक के भीतर चल रहे द्वंद्व का प्रभावशाली चित्रण।

📚 पाठक को झकझोरने वाली भाषा – जो पढ़ने के बाद भी लंबे समय तक मन में बनी रहती है।

🏆 हिंदी साहित्य में नया तेवर – जो परंपरा को तोड़कर नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

1. अपने उपन्यास ‘औघड़’ की प्रस्तावना में आप ने लिखा है- ‘मैंने उपन्यास नहीं लिखा बल्कि अपने मारे जाने की ज़मानत लिखी है’। आपके ज़ेहन में ऐसा लिखने का ख़याल कैसे आया?

हम जिस सामाजिक परिवेश और दौर में रह रहे हैं वहाँ जातिय और लैंगिक तथा आर्थिक तथा राजनीतिक-सामाजिक विचारधाराओं का भेद इतना ज़्यादा जटिल और गहरा है कि अगर इस पर कोई भी क़लम मुखर होकर बोले, तो वह उन विडंबनाओं और रूढ़ियों को ख़ुद पर हमला लगता है। ऐसे में ज़ाहिर है कि वे पलटवार करेंगे, क़लम के विरोध में आक्रामक होंगे। इसलिए किसी भी कलम के लिए रूढ़ियों के खिलाफ़ लिखने का मतलब उस ख़तरे के लिए तैयार रहना है जो रूढ़ियों की तरफ़ से होगा। इसलिए भूमिका में मैंने अपने मारे जाने की ही ज़मानत लिखी है। दरअसल, मैं उन हमलों के लिए तैयार हूँ।

2. ‘औघड़’ ग्रामीण परिवेश को रेखांकित करता उपन्यास है। ग्रामीण परिवेश पर लिखना कैसा अनुभव रहा?

मैं उसी परिवेश में रहने वाला आदमी हूँ। उसी दुनिया का आज भी हिस्सा हूँ। इस कारण लिखने में रुचि रही और सहज लिख पाया।

3. सोशल मीडिया पर आपकी पकड़ मज़बूत होती जा रही है। क्या सोशल मीडिया साहित्य के उत्थान में एक कारगर घटक बन सकता है?

मेरी पकड़ क्या है, यह नहीं बताया जा सकता। सोशल मीडिया पर पकड़ का पैमाना क्या है, यह नहीं पता मुझे। हाँ, इतना भर ही जानता हूँ कि वहाँ से ढेरों पाठक मिले, उनका स्नेह मिला और उनके दिए हौसले से लिखने की हिम्मत मिली। इस लिहाज़ से सोशल मिडिया मेरे लिए तो बेहद कारगर रहा है।


About the Author
साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित नीलोत्पल मृणाल 21वीं सदी की नई पीढ़ी के सर्वाधिक लोकप्रिय लेखकों में से एक हैं, जिनमें कलम के साथ-साथ राजनैतिक और सामाजिक मुद्दों पर ज़मीनी रूप से लड़ने का तेवर भी हैं। इसीलिए इनके लेखन में भी सामाजिक विषमताएँ, विडंबनाएँ और आपसी संघर्ष बहुत स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होते हैं। लेखन के अलावा लोकगायन और कविताई में बराबर गति रखने वाले नीलोत्पल ने अपने पहले उपन्यास ‘डार्क हॉर्स’ के बरक्स ‘औघड़’ में ग्रामीण भारत के राजनैतिक-सामाजिक जटिलता की गाँठ पर अपनी कलम रखी है। ‘औघड़’ नई वाली हिंदी के वितान का एक नया विस्तार है।

Search Key : औघड़ उपन्यास नीलोत्पल मृणाल, , औघड़ बुक रिव्यू हिंदी, , औघड़ किताब का सारांश, , Nilotpal Mrinal new book Aughad, , औघड़ पुस्तक समीक्षा, , Hind Yugm औघड़ बुक, , औघड़ उपन्यास का मुख्य पात्र, , औघड़ किताब के विचार, , औघड़ उपन्यास प्रमुख विषय, , औघड़ पुस्तक का अर्थ, , औघड़ और सामाजिक यथार्थ, , औघड़ उपन्यास कहानी, , औघड़ पुस्तक का संदेश, , औघड़ नीलोत्पल मृणाल quotes, , औघड़ बुक मुख्य संवाद, , औघड़ उपन्यास की समीक्षा, , औघड़ और समकालीन राजनीति, , औघड़ हिंदी उपन्यास सारांश, , नीलोत्पल मृणाल की औघड़ बुक, , औघड़ उपन्यास का उद्देश्य, , औघड़ उपन्यास विचारधारा, , औघड़ उपन्यास में औघड़ कौन है, , औघड़ उपन्यास पाठकों की राय, , औघड़ और आत्मखोज, , औघड़ और आध्यात्मिक दृष्टिकोण, , औघड़ उपन्यास का नायक, , औघड़ बुक की समीक्षा हिंदी में, , औघड़ और ग्रामीण भारत, , औघड़ उपन्यास की विशेषताएं, , औघड़ और समाज में बदलावAughad,  औघड़, , Nilotpal Mrinal, Hind Yugm Publication, Hindi Medium, Publisher ‏ : ‎ Hind Yugm; First edition (4 February 2019), Language ‏ : ‎ Hindi, Paperback ‏ : ‎ 384 pages, ISBN-10 ‏ : ‎ 9387464504, ISBN-13 ‏ : ‎ 978-9387464506, Aughad Book By Hind Yugm Publisher, Story Book, Aughad Book in Hindi, Fiction Book.

Product Details
SKU / BOOK Code: HYP-Aughad-(Hindi)
Publisher: Hind Yugm Publication
Author:
Binding Type: Paperback
No. of Pages: 384
ISBN-10: 9387464504
ISBN-13: 978-9387464506
Edition: 1st Edition
Language: Hindi Medium
Publish Year: 2025-08
Weight (g): 500
Product Condition: New
Reading Age: Above 10 Years
Country of Origin: India
Genre: Horror
Manufacturer: Hind Yugm Publication
Importer: Hind Yugm Publication
Packer: Fullfilled by Supplier
Product Description
Aughad - औघड़ | By Nilotpal Mrinal | 1st Edition | Hind Yugm Publication ( Hindi Medium ).

📖 पुस्तक का सारांश:
"औघड़" एक बेहतरीन हिंदी उपन्यास है जो समाज, राजनीति, आध्यात्मिकता और मानवीय संवेदनाओं की गहराइयों को छूता है। यह नीलोत्पल मृणाल की लेखनी का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें यथार्थवादी भाषा, ग्रामीण जीवन की झलक, और तीखे सामाजिक सवालों को अद्भुत तरीके से पिरोया गया है।

‘औघड़’ न केवल एक शब्द है, बल्कि एक विचार है — जो दुनियावी बंधनों से मुक्त, निडर, और सत्य की खोज में लीन व्यक्ति का प्रतीक है। उपन्यास का नायक समाज के ढोंग, पाखंड और राजनैतिक छल-प्रपंचों के विरुद्ध खड़ा होता है। यह पुस्तक आज के सामाजिक परिप्रेक्ष्य में युवाओं को आत्ममंथन और परिवर्तन की राह पर चलने को प्रेरित करती है।

✨ प्रमुख विशेषताएँ:
🖋️ नीलोत्पल मृणाल की अनूठी लेखन शैली – व्यंग्य, कटाक्ष और संवेदनशीलता का अद्भुत मिश्रण।

🧠 गंभीर सामाजिक मुद्दों की पड़ताल – भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, जातिवाद, और धर्म के नाम पर राजनीति।

🔥 यथार्थवादी पात्र और संवाद – ग्रामीण भारत की सच्ची झलक।

🎭 दर्शन और आध्यात्मिकता की गहराई – औघड़ अवधारणा को व्यावहारिक और बौद्धिक रूप से प्रस्तुत किया गया है।

📢 समकालीन भारत की कथा – जो आज के युवाओं को गहराई से जोड़ती है।

🧩 आत्मखोज और विद्रोह का संगम – नायक के भीतर चल रहे द्वंद्व का प्रभावशाली चित्रण।

📚 पाठक को झकझोरने वाली भाषा – जो पढ़ने के बाद भी लंबे समय तक मन में बनी रहती है।

🏆 हिंदी साहित्य में नया तेवर – जो परंपरा को तोड़कर नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

1. अपने उपन्यास ‘औघड़’ की प्रस्तावना में आप ने लिखा है- ‘मैंने उपन्यास नहीं लिखा बल्कि अपने मारे जाने की ज़मानत लिखी है’। आपके ज़ेहन में ऐसा लिखने का ख़याल कैसे आया?

हम जिस सामाजिक परिवेश और दौर में रह रहे हैं वहाँ जातिय और लैंगिक तथा आर्थिक तथा राजनीतिक-सामाजिक विचारधाराओं का भेद इतना ज़्यादा जटिल और गहरा है कि अगर इस पर कोई भी क़लम मुखर होकर बोले, तो वह उन विडंबनाओं और रूढ़ियों को ख़ुद पर हमला लगता है। ऐसे में ज़ाहिर है कि वे पलटवार करेंगे, क़लम के विरोध में आक्रामक होंगे। इसलिए किसी भी कलम के लिए रूढ़ियों के खिलाफ़ लिखने का मतलब उस ख़तरे के लिए तैयार रहना है जो रूढ़ियों की तरफ़ से होगा। इसलिए भूमिका में मैंने अपने मारे जाने की ही ज़मानत लिखी है। दरअसल, मैं उन हमलों के लिए तैयार हूँ।

2. ‘औघड़’ ग्रामीण परिवेश को रेखांकित करता उपन्यास है। ग्रामीण परिवेश पर लिखना कैसा अनुभव रहा?

मैं उसी परिवेश में रहने वाला आदमी हूँ। उसी दुनिया का आज भी हिस्सा हूँ। इस कारण लिखने में रुचि रही और सहज लिख पाया।

3. सोशल मीडिया पर आपकी पकड़ मज़बूत होती जा रही है। क्या सोशल मीडिया साहित्य के उत्थान में एक कारगर घटक बन सकता है?

मेरी पकड़ क्या है, यह नहीं बताया जा सकता। सोशल मीडिया पर पकड़ का पैमाना क्या है, यह नहीं पता मुझे। हाँ, इतना भर ही जानता हूँ कि वहाँ से ढेरों पाठक मिले, उनका स्नेह मिला और उनके दिए हौसले से लिखने की हिम्मत मिली। इस लिहाज़ से सोशल मिडिया मेरे लिए तो बेहद कारगर रहा है।


About the Author
साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित नीलोत्पल मृणाल 21वीं सदी की नई पीढ़ी के सर्वाधिक लोकप्रिय लेखकों में से एक हैं, जिनमें कलम के साथ-साथ राजनैतिक और सामाजिक मुद्दों पर ज़मीनी रूप से लड़ने का तेवर भी हैं। इसीलिए इनके लेखन में भी सामाजिक विषमताएँ, विडंबनाएँ और आपसी संघर्ष बहुत स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होते हैं। लेखन के अलावा लोकगायन और कविताई में बराबर गति रखने वाले नीलोत्पल ने अपने पहले उपन्यास ‘डार्क हॉर्स’ के बरक्स ‘औघड़’ में ग्रामीण भारत के राजनैतिक-सामाजिक जटिलता की गाँठ पर अपनी कलम रखी है। ‘औघड़’ नई वाली हिंदी के वितान का एक नया विस्तार है।

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