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Jeevan Ke Din | Prabhat | 1st Edition, 2020 | Rajkamal Prakashan ( Hindi Medium )
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| 117-199 |
"Jeevan Ke Din" is a thought-provoking and insightful book that delves into the various aspects of life and its complexities. Written by Prabhat, this 1st edition published in 2020 by Rajkamal Prakashan in Hindi medium, offers readers a unique perspective on the journey of life. The book explores the different phases of life, from childhood to old age, highlighting the challenges and joys that come with each stage. Through a series of poignant stories and reflections, the author invites readers to contemplate their own experiences and relationships, encouraging them to find meaning and purpose in their lives. With its engaging narrative style and relatable characters, "Jeevan Ke Din" is sure to resonate with readers of all ages. Whether you are a young adult navigating the complexities of adulthood or an older individual reflecting on your past, this book offers valuable insights into the human experience. As you immerse yourself in the pages of "Jeevan Ke Din," you will be inspired to pause and reflect on your own journey through life. The book serves as a reminder to cherish each moment, embrace change, and find happiness amidst adversity. Discover the beauty of life's ups and downs with "Jeevan Ke Din" - a must-read for anyone seeking wisdom and inspiration in their daily lives.
Jeevan Ke Din कवि प्रभात का एक अत्यंत संवेदनशील और प्रकृति-सन्निकट काव्य-संग्रह है, जो जीवन के सूक्ष्म अनुभवों, भावनाओं और मानवीय संवेदनाओं को बेहद शांत, गहरे और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करता है। यह संग्रह उन कविताओं का संसार रचता है, जो किसी शोर या दिखावे के बिना धीरे-धीरे पाठक के भीतर उतरती हैं और उसकी चेतना को एक नई दिशा देती हैं।
इस काव्य-संग्रह की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सादगी और आत्मीयता है। ये कविताएँ किसी कृत्रिम साहित्यिक आडंबर का सहारा नहीं लेतीं, बल्कि सीधे जीवन के अनुभवों से जन्म लेती हैं। कवि ने इन कविताओं को ऐसे रचा है जैसे कोई व्यक्ति प्रकृति के बीच टहलते हुए, हवा की धीमी गति और बहते पानी की लय को महसूस करता है। यही कारण है कि इन कविताओं में एक सहज प्रवाह और पारदर्शिता दिखाई देती है।
कवि प्रभात की रचनात्मक दृष्टि शहरी मुख्यधारा से अलग हटकर लोक जीवन और प्रकृति के अधिक निकट है। उन्होंने शहर से केवल भाषा की लिपि ली है, लेकिन उनकी संवेदनाएँ, अनुभव और अभिव्यक्ति पूरी तरह से अपने परिवेश से जुड़ी हुई हैं। यह संग्रह यह दर्शाता है कि सच्ची कविता वही होती है, जो जीवन के मूल तत्वों से जुड़ी हो और जो पाठक को उसके अपने अनुभवों से जोड़ सके।
Jeevan Ke Din की कविताएँ किसी एक भाव या विषय तक सीमित नहीं हैं। इनमें जीवन के हर रंग मौजूद हैं—दुख, सुख, प्रेम, बिछोह, अभाव, संघर्ष, आशा और मृत्यु तक। लेकिन इन भावों को प्रस्तुत करने का तरीका बहुत ही शांत और सहज है। ये कविताएँ पाठक पर किसी तरह का दबाव नहीं डालतीं, बल्कि धीरे-धीरे उसके भीतर अपनी जगह बनाती हैं।
इस संग्रह की एक खास बात यह भी है कि इन कविताओं को पारंपरिक आलोचना के मापदंडों से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। ये कविताएँ अपनी विषयवस्तु और शैली के साथ इतनी एकरूप हैं कि इन्हें अलग-अलग करके विश्लेषण करना कठिन हो जाता है। यह उनकी सबसे बड़ी ताकत है—वे अपने आप में सम्पूर्ण हैं और पाठक को एक संपूर्ण अनुभव प्रदान करती हैं।
कवि ने इन कविताओं में प्रकृति के साथ गहरा संबंध स्थापित किया है। प्रकृति यहाँ केवल एक पृष्ठभूमि नहीं है, बल्कि यह कविताओं का एक जीवंत हिस्सा है। पक्षियों की उड़ान, हवा की गति, पेड़ों की छाया, बारिश की चाल—ये सब तत्व कविताओं में इस तरह शामिल हैं कि पाठक खुद को उस परिवेश का हिस्सा महसूस करने लगता है।
संग्रह की प्रसिद्ध कविता “गड़रिये” इस काव्य-संसार का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस कविता में गड़रियों के जीवन को बहुत ही सरल और मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। वे लोग जो प्रकृति के साथ रहते हैं, जिनका जीवन शहरी जटिलताओं से दूर है, उनकी सादगी और गहराई को यह कविता खूबसूरती से दर्शाती है। यह कविता न केवल उनके जीवन का चित्रण करती है, बल्कि पाठक को यह सोचने पर भी मजबूर करती है कि आधुनिक जीवन में हम क्या खोते जा रहे हैं।
Jeevan Ke Din की कविताएँ एक तरह का मौन प्रतिरोध भी प्रस्तुत करती हैं। यह प्रतिरोध किसी आक्रामक रूप में नहीं, बल्कि एक शांत और स्थिर दृष्टि के माध्यम से सामने आता है। कवि समाज की वाचालता, उसके दंभ और उसकी व्यर्थता को बिना किसी शोर के उजागर करते हैं। यह एक ऐसा प्रतिरोध है, जो पाठक के भीतर गहराई से असर डालता है।
इन कविताओं में एक खास तरह की मासूमियत और निष्कपटता भी दिखाई देती है। यह मासूमियत उन्हें और अधिक प्रभावशाली बनाती है, क्योंकि यह पाठक को उसके अपने बचपन, उसके अपने अनुभवों और उसकी अपनी संवेदनाओं से जोड़ देती है। यह संग्रह पढ़ते समय ऐसा लगता है जैसे हम किसी शांत, प्राकृतिक वातावरण में बैठे हैं और जीवन को उसकी पूरी सच्चाई के साथ महसूस कर रहे हैं।
कवि की भाषा बेहद सरल, सहज और पारदर्शी है। वे कठिन शब्दों या जटिल अभिव्यक्तियों का प्रयोग नहीं करते, बल्कि साधारण शब्दों के माध्यम से असाधारण भावों को व्यक्त करते हैं। यही कारण है कि यह काव्य-संग्रह हर प्रकार के पाठकों के लिए सुलभ और पठनीय है।
यह पुस्तक उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है, जो कविता के माध्यम से जीवन को समझना चाहते हैं। यह छात्रों, साहित्य प्रेमियों और उन सभी पाठकों के लिए उपयोगी है, जो गहराई और शांति की तलाश में हैं। यह संग्रह न केवल एक साहित्यिक कृति है, बल्कि यह एक ऐसा अनुभव है, जो पाठक को भीतर से समृद्ध करता है।
Jeevan Ke Din हमें यह सिखाता है कि जीवन की सच्चाई को समझने के लिए हमें शोर से दूर होकर, प्रकृति और अपने भीतर के मौन से जुड़ना होगा। यह संग्रह हमें धीमे चलने, महसूस करने और जीवन को उसकी पूरी गहराई के साथ जीने का संदेश देता है।
अंततः, यह कहा जा सकता है कि Jeevan Ke Din एक ऐसा काव्य-संग्रह है, जो अपनी सादगी, संवेदनशीलता और गहराई के कारण पाठकों के दिल में एक खास जगह बना लेता है। यह केवल पढ़ने की चीज़ नहीं है, बल्कि महसूस करने और जीने का अनुभव है। अगर आप ऐसी कविताएँ पढ़ना चाहते हैं, जो आपको भीतर तक छू जाएँ और जीवन को एक नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करें, तो यह पुस्तक आपके लिए एक उत्कृष्ट चयन है।
| SKU / BOOK Code: | JKD-PR-2020-HIN |
| Publisher: | Rajkamal Prakashan |
| Author: | Prabhat |
| Binding Type: | Paperback |
| No. of Pages: | 176 |
| ISBN-10: | NA |
| ISBN-13: | NA |
| Edition: | 2020 Ed. 1st |
| Language: | Hindi Medium |
| Publish Year: | 2020-01 |
| Weight (g): | 200 |
| Product Condition: | New |
| Reading Age: | Above 18 Years |
| Country of Origin: | India |
| Genre: | Short story |
| Manufacturer: | Rajkamal Prakashan |
| Importer: | Rajkamal Prakashan |
| Packer: | Fullfilled by Supplier |
"Jeevan Ke Din" is a thought-provoking and insightful book that delves into the various aspects of life and its complexities. Written by Prabhat, this 1st edition published in 2020 by Rajkamal Prakashan in Hindi medium, offers readers a unique perspective on the journey of life. The book explores the different phases of life, from childhood to old age, highlighting the challenges and joys that come with each stage. Through a series of poignant stories and reflections, the author invites readers to contemplate their own experiences and relationships, encouraging them to find meaning and purpose in their lives. With its engaging narrative style and relatable characters, "Jeevan Ke Din" is sure to resonate with readers of all ages. Whether you are a young adult navigating the complexities of adulthood or an older individual reflecting on your past, this book offers valuable insights into the human experience. As you immerse yourself in the pages of "Jeevan Ke Din," you will be inspired to pause and reflect on your own journey through life. The book serves as a reminder to cherish each moment, embrace change, and find happiness amidst adversity. Discover the beauty of life's ups and downs with "Jeevan Ke Din" - a must-read for anyone seeking wisdom and inspiration in their daily lives.
Jeevan Ke Din कवि प्रभात का एक अत्यंत संवेदनशील और प्रकृति-सन्निकट काव्य-संग्रह है, जो जीवन के सूक्ष्म अनुभवों, भावनाओं और मानवीय संवेदनाओं को बेहद शांत, गहरे और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करता है। यह संग्रह उन कविताओं का संसार रचता है, जो किसी शोर या दिखावे के बिना धीरे-धीरे पाठक के भीतर उतरती हैं और उसकी चेतना को एक नई दिशा देती हैं।
इस काव्य-संग्रह की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सादगी और आत्मीयता है। ये कविताएँ किसी कृत्रिम साहित्यिक आडंबर का सहारा नहीं लेतीं, बल्कि सीधे जीवन के अनुभवों से जन्म लेती हैं। कवि ने इन कविताओं को ऐसे रचा है जैसे कोई व्यक्ति प्रकृति के बीच टहलते हुए, हवा की धीमी गति और बहते पानी की लय को महसूस करता है। यही कारण है कि इन कविताओं में एक सहज प्रवाह और पारदर्शिता दिखाई देती है।
कवि प्रभात की रचनात्मक दृष्टि शहरी मुख्यधारा से अलग हटकर लोक जीवन और प्रकृति के अधिक निकट है। उन्होंने शहर से केवल भाषा की लिपि ली है, लेकिन उनकी संवेदनाएँ, अनुभव और अभिव्यक्ति पूरी तरह से अपने परिवेश से जुड़ी हुई हैं। यह संग्रह यह दर्शाता है कि सच्ची कविता वही होती है, जो जीवन के मूल तत्वों से जुड़ी हो और जो पाठक को उसके अपने अनुभवों से जोड़ सके।
Jeevan Ke Din की कविताएँ किसी एक भाव या विषय तक सीमित नहीं हैं। इनमें जीवन के हर रंग मौजूद हैं—दुख, सुख, प्रेम, बिछोह, अभाव, संघर्ष, आशा और मृत्यु तक। लेकिन इन भावों को प्रस्तुत करने का तरीका बहुत ही शांत और सहज है। ये कविताएँ पाठक पर किसी तरह का दबाव नहीं डालतीं, बल्कि धीरे-धीरे उसके भीतर अपनी जगह बनाती हैं।
इस संग्रह की एक खास बात यह भी है कि इन कविताओं को पारंपरिक आलोचना के मापदंडों से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। ये कविताएँ अपनी विषयवस्तु और शैली के साथ इतनी एकरूप हैं कि इन्हें अलग-अलग करके विश्लेषण करना कठिन हो जाता है। यह उनकी सबसे बड़ी ताकत है—वे अपने आप में सम्पूर्ण हैं और पाठक को एक संपूर्ण अनुभव प्रदान करती हैं।
कवि ने इन कविताओं में प्रकृति के साथ गहरा संबंध स्थापित किया है। प्रकृति यहाँ केवल एक पृष्ठभूमि नहीं है, बल्कि यह कविताओं का एक जीवंत हिस्सा है। पक्षियों की उड़ान, हवा की गति, पेड़ों की छाया, बारिश की चाल—ये सब तत्व कविताओं में इस तरह शामिल हैं कि पाठक खुद को उस परिवेश का हिस्सा महसूस करने लगता है।
संग्रह की प्रसिद्ध कविता “गड़रिये” इस काव्य-संसार का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस कविता में गड़रियों के जीवन को बहुत ही सरल और मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। वे लोग जो प्रकृति के साथ रहते हैं, जिनका जीवन शहरी जटिलताओं से दूर है, उनकी सादगी और गहराई को यह कविता खूबसूरती से दर्शाती है। यह कविता न केवल उनके जीवन का चित्रण करती है, बल्कि पाठक को यह सोचने पर भी मजबूर करती है कि आधुनिक जीवन में हम क्या खोते जा रहे हैं।
Jeevan Ke Din की कविताएँ एक तरह का मौन प्रतिरोध भी प्रस्तुत करती हैं। यह प्रतिरोध किसी आक्रामक रूप में नहीं, बल्कि एक शांत और स्थिर दृष्टि के माध्यम से सामने आता है। कवि समाज की वाचालता, उसके दंभ और उसकी व्यर्थता को बिना किसी शोर के उजागर करते हैं। यह एक ऐसा प्रतिरोध है, जो पाठक के भीतर गहराई से असर डालता है।
इन कविताओं में एक खास तरह की मासूमियत और निष्कपटता भी दिखाई देती है। यह मासूमियत उन्हें और अधिक प्रभावशाली बनाती है, क्योंकि यह पाठक को उसके अपने बचपन, उसके अपने अनुभवों और उसकी अपनी संवेदनाओं से जोड़ देती है। यह संग्रह पढ़ते समय ऐसा लगता है जैसे हम किसी शांत, प्राकृतिक वातावरण में बैठे हैं और जीवन को उसकी पूरी सच्चाई के साथ महसूस कर रहे हैं।
कवि की भाषा बेहद सरल, सहज और पारदर्शी है। वे कठिन शब्दों या जटिल अभिव्यक्तियों का प्रयोग नहीं करते, बल्कि साधारण शब्दों के माध्यम से असाधारण भावों को व्यक्त करते हैं। यही कारण है कि यह काव्य-संग्रह हर प्रकार के पाठकों के लिए सुलभ और पठनीय है।
यह पुस्तक उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है, जो कविता के माध्यम से जीवन को समझना चाहते हैं। यह छात्रों, साहित्य प्रेमियों और उन सभी पाठकों के लिए उपयोगी है, जो गहराई और शांति की तलाश में हैं। यह संग्रह न केवल एक साहित्यिक कृति है, बल्कि यह एक ऐसा अनुभव है, जो पाठक को भीतर से समृद्ध करता है।
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